श्री सौरभ सागर जी आरती

गुरु देव की मंगल आरती करे
सौरभ सागर की , ज्ञान दिवाकर की -2
आरती उतारे गुरुवर की आयो मिल के हम -2
सौरभ सागर गुरु की निरखु रे सुरतिया
मणि दीपो से गुरु की उतारू में आरातिया
ओ -ढोलक मंजीरा बाजे भाव जगाने को
पग में नुपुर झनकारे कर्म छुड़ाने को
जगमग जगमग दीप जला कर आरती गाये आओ रे
ज्ञान का भण्डार गुर्वर साथ लाये आओ रे
सौरभ सागर की ज्ञान दिवाकर की आरती उतारे गुरुवर की आओ मिल के हम .......
श्री पाल का जश बढाया जशपुर नगरी में जन्मे
तुमसा पुत्र पाकर माता चंद्रप्रभा हर्षे
चार दिशा सी सुन्दर चार बहने है पाई
साथ रहते थे हिलमिल कर सारे भाई
बचपन में पुष्प गुरु का दर्श जो पाया था
सुरेन्द्र से सौरभ बने वीतराग मन आया था
सौरभ सागर की ज्ञान दिवाकर की आरती उतारे गुरुवर की आओ मिल के हम....
पञ्च महाव्रत धारी उर में करुना समाई
दिया है ज्ञान तुमने मुक्ति की राह दिखाई
सौरभ गुरुवर का जिसने भी पाया है शरणा
मिथ्या को ताज कर पाटा है सम्यक रतना
श्रद्धा और भक्ति का दीप मन में जलाये
गुरु की आरती करके भव का तम नाश जाए
सौरभ सागर की ज्ञान दिवाकर की आरती उतारे गुरुवर की आओ मिलके हम.......
'सौरभान्चल तीर्थ' बनाकर नवग्रह कष्ट मिटाए
'जीवन आशा ' जगाकर जनजन को सुखी बनाये
संस्कारों का दीप जला कर करता मन पावन
'ज्ञानयोगी 'गुरुवर भर देता खुशियों से दामन
'मनहर पारस 'दर्श करा कर बन गये तुम मनहर
नाव 'विभा 'की पार उतारो हे !सौरभ गुरुवर
सौरभ सागर की ज्ञान दिवाकर की आरती उतारे गुरुवर की आओ मिलके हम......
||सौरभ सागर जी महाराज की जय ||