Latest Artical

मुनि श्री सौरभ सागर जी महाराजा के प्रवचन

Mar 02 2016
Posted by : Ashok Jain Indirapuram Ghaziabad

जैन मुनि संस्कार प्रेनता मुनि श्री सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि अच्छी शिक्षा और संस्कार एक दूसरे के पूरक हैं, संस्कृति की सुरक्षा संस्कारों से ही संभव है।
उन्होने बताया कि वर्तमान समय में बच्चे और युवा पीढी धार्मिक कार्यो में रुचि नहीं लेते, वे भगवान को अपना नौकर समझते हैं और अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए ही उनका स्मरण करते हैं। आकांक्षा की पूर्ति न होने पर वे नास्तिक बन जाते हैं।
जब तक बीज बोया नहीं जाता कोपलें नहीं निकलती। ठीक उसी प्रकार ईश्वर पर आस्था रखने से ही सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मुनि श्री ने माता-पिता को सचेत करते हुए कहा कि आज के युग में बच्चे सिखाने से कम देखकर ज्यादा सीखते हैं। पारिवारिक कलह बच्चों की मनोदशा को बुरी तरह प्रभावित करती है। इसलिए बच्चों को संस्कारित करने के लिए माता-पिता का संस्कारवान होना बहुत जरूरी है।