Latest Artical

परोपकार दिवस पर विशेष प्रवचन

Oct 24 2016
Posted by : अशोक जैन इंदिरापुरम

संस्कार प्रणेता मुनि श्री 108 *सौरभ सागर जी महाराज ने आज परोपकार दिवस के अवसर पर* उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा की जीवन एक किताब है इसके प्रथम पृष्ठ पर जन्म एवं अंतिम पृष्ठ पर मृत्यु लिखी होती है जो मनुष्य पहले एवं अंतिम पृष्ठ को ना देखकर बीच के पृष्ठ पर जीवन की साधना, जीवन की आराधना, जीवन का परोपकार, जीवन की सेवा, जीवन की सत्य निष्ठा, जीवन की इमानदारी, जीवन का तप, जीवन की परोपकारिता, जीवन की साधना लिखना प्रारंभ कर देता है उसी का जीवन हमारे लिए आदर्श एवं पूज्य बनना शुरू हो जाता है। यदि हम जीवन के कागज पर परमात्मा के गीत लिखते हैं तो हमारा ही नहीं जो वह गीत सुनता है उसका भी कल्याण होता है एवं यदि हम जीवन के कागज पर विकृति लिखते हैं तो न केवल हमारा जीवन धरातल में पहुंच जाता है एवं संगति करने वाला भी रसातल में चला जाता है।
wwe.sourabhsagar.com
मुनि श्री सौरभ सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य एवं संत के जन्म लेने की प्रक्रिया में कोई अंतर नहीं होता है परंतु साधना तप के रास्ते से संत अपने साथ साथ सबका कल्याण करता है।
मुनि श्री ने कहा कि कीचड़ में जन्म लेना दुर्भाग्य नहीं है वरन कीचड़ में ही अपना जन्म को समाप्त कर देना दुर्भाग्य है जिस प्रकार मनुष्य अपने पर्स में अच्छी-अच्छी चीजें रखता है उसी प्रकार हमें अपनी आत्मा में विषय वासना का कचरा को न डालकर परोपकार रूपी अच्छी चीजें डालनी है।
www.sourabhsagar.com
*मुनि श्री ने बताया कि* हम उपकार के साथ कभी कभी इतने अपकार कर जाते हैं जिससे उपकार का फल नहीं मिलता उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जीवन को रॉकेट के समान मत बनाओ, रॉकेट जाने के बाद पीछे धुआं छोड़ जाता है, जीवन को जहाज के समान होना चाहिए जो जाने के बाद निशान भी नहीं छोड़ता।
*मुनि श्री ने कहा* कि यदि सुख आए तो मिठाई समझकर खुद भी खाना और दूसरों को भी खिलाना परंतु यदि दुख आए तो दवाई मानकर खुद ही खाना दूसरों को मत खिलाना,अपने सुख में दूसरों को सहयोगी सहभागी बना लेना एवं दूसरो के दुख में उनके सहभागी बन जाना।
*मुनि श्री ने कहा* कीमती वस्तु महत्वपूर्ण नहीं है वरन मूल्यवान वस्तु महत्वपूर्ण है जिस प्रकार जेवर कीमती होते हैं परंतु यदि आप किसी समारोह में केवल जेवर पहन कर चले जाएं एवम कपडे न पहने तो आपको कोई भी इज्जत नहीं देगा जबकि कपड़े कीमती नहीं है लेकिन इस अवसर पर कपड़े मूल्यवान है *जीवन में मूल्यवान बनो कीमती नहीं*
अंत में मुनि श्री ने समस्त भक्तो को आशीर्वाद दिया